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जातीय जन-गणनाः सोया भूत जगाया
February 28, 2020 • YUNUS ALI KHAN

बिहार के मुख्यमंत्री नीतिशकुमार ने अपनी विधानसभा में नागरिकता के संबंध में सर्वसम्मति से जो प्रस्ताव पारित करवाया, उसकी मैंने भरपूर तारीफ की थी लेकिन मुझे बड़ा अफसोस है कि इसी विधानसभा ने कल जनसंख्या-गणना के सवाल पर शीर्षासन कर दिया। उसके अनुसार बिहार की जन-गणना में अब जातिवार जन-गणना भी होगी। 2010 में मैंने जातीय जन-गणना के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन चलाया था। इस आंदोलन में देश के कई दलों के नेता, पूर्व मंत्री, सांसद, बुद्धिजीवी, कलाकार और पत्रकार शामिल थे। मनमोहनसिंह की कांग्रेस सरकार ने अपनी भूल स्वीकार की और जातीय जन-गणना बीच में ही रुकवा दी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसमें विशेष रुचि ली थी। नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। वे हमसे सहमत थे। उन्होंने हमारा साथ दिया था। प्रधानमंत्री बनने पर उन्होंने, जातीय जन-गणना के आंकड़े जितने भी इकट्ठे हुए थे, उन्हें प्रकाशित नहीं होने दिया लेकिन नीतिशकुमार ने ऐसा तुरुप का पत्ता मारा है कि उसने भाजपा और कांग्रेस दोनों को चित कर दिया है। दोनों पार्टियों, बल्कि सभी पार्टियों ने बिहार विधानसभा में घुटने टेक दिए हैं। यह ठीक है कि बिहार जातिवाद का गढ़ है और वहां जाति की सीढ़ी पर चढ़े बिना चुनाव जीतना असंभव है लेकिन जातीय जन-गणना के दूरगामी दुष्परिणाम इतने भयावह होंगे कि भारत कई सदियों पीछे चला जाएगा।