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लखनऊ-आईएएस अनुराग तिवारी केस, प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र पर आदेश सुरक्षित
February 29, 2020 • YUNUS ALI KHAN

लखनऊ। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीबीआई सुव्रत पाठक ने कर्नाटक कैडर के आईएएस अफसर अनुराग तिवारी की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत के संबंध में उनके भाई मयंक तिवारी द्वारा दायर प्रोटेस्ट याचिका पर आज अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया,कोर्ट ने यह आदेश मयंक की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर तथा सीबीआई के अधिवक्ता को सुनने के बाद पारित किया,सीबीआई ने यह कहते हुए केस बंद कर दिया था कि मृतक द्वारा किसी बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने या उनके बड़े अफसरों द्वारा मृत्यु का भय होने के आरोपों की मौखिक, लिखित तथा तकनीकी साक्ष्यों से पुष्टि नहीं हो सकी. नूतन ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई द्वारा विवेचना के कई महत्वपूर्ण बिन्दुओ को नजरंदाज किया गया था तथा उन्होंने यह पूरी विवेचना पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण के साथ इस केस को दुर्घटना बताने के उद्देश्य से संपादित की. इस प्रकिया में सीबीआई ने कई सारे तथ्यों एवं साक्ष्यों को दरकिनार किया, कई महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्यों को छोड़ दिया एवं पोस्ट मार्टम रिपोर्ट की जानबूझ कर गलत व्याख्या की,उन्होंने बताया कि प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र में विवेचना की समस्त खामियों को प्रस्तुत करते हुए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए एसपी रैंक के अधिकारी से विवेचना करवाए जाने की प्रार्थना की गयी है। सीबीआई के अधिवक्ता ने कहा कि केस के सभी पहलूओं को गंभीरता से देखा गया तथा मौत में किसी प्रकार की सदिग्ध स्थिति नहीं पायी गयी. उन्होंने कहा कि पोस्टमोर्टेम रिपोर्ट पर एम्स के डॉक्टरों की पैनल से भी राय ली गयी थी। प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र पर 13 मार्च 2020 को आदेश पारित होगा।